जब भी हम भारत में जमीन के सबसे बड़े मालिकों की बात करते हैं, तो आमतौर पर भारतीय सेना, रेलवे या सरकार का नाम आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वक्फ बोर्ड अकेले ही देश की 5% भूमि के मालिक हैं? यह जमीन दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता के कुल क्षेत्रफल से भी कहीं ज्यादा है!
वक्फ संपत्ति का रहस्य – आखिर यह जमीन आई कहाँ से?
वक्फ एक इस्लामी प्रथा है, जिसमें लोग अपनी संपत्ति को धार्मिक और परोपकारी कार्यों के लिए अल्लाह के नाम पर दान कर देते हैं। एक बार जब कोई जमीन वक्फ कर दी जाती है, तो उसकी मालिकाना हक़ीक़त खत्म हो जाती है – यानी इसे बेचा नहीं जा सकता। भारत में वक्फ बोर्डों के पास 39 लाख एकड़ भूमि है, जो सेना और रेलवे की कुल जमीन से भी ज्यादा है।
वक्फ संशोधन बिल – पारदर्शिता की ओर एक कदम
हाल ही में सरकार ने Waqf Amendment Bill पास किया, जिसे UMEED Bill भी कहा जा रहा है। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। यह बिल वक्फ संपत्तियों के अनियमित हस्तांतरण और अतिक्रमण पर भी रोक लगाने के लिए कुछ नए नियम लेकर आया है।
2013 के बाद कैसे बढ़ी वक्फ भूमि?
गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, 1913 से 2013 तक वक्फ बोर्डों के पास 18 लाख एकड़ भूमि थी। लेकिन 2013 के बाद, जब UPA सरकार ने वक्फ अधिनियम में संशोधन किया, तो इसमें 21 लाख एकड़ की वृद्धि हो गई! अब यह 39 लाख एकड़ हो चुकी है।
साल | वक्फ भूमि (लाख एकड़) | रक्षा भूमि (लाख एकड़) | रेलवे भूमि (लाख एकड़) |
---|---|---|---|
1947 | – | 3.05 | – |
2013 | 18.00 | – | – |
2025 | 39.00 | 17.99 | 12.11 |
क्या वक्फ भूमि भारत के मेट्रो शहरों से भी ज्यादा है?
हैरानी की बात यह है कि भारत की छह सबसे बड़ी मेट्रो सिटीज – दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता का कुल क्षेत्रफल सिर्फ 12 लाख एकड़ है। अगर इसमें पुणे, अहमदाबाद और जयपुर को भी जोड़ दें, तब भी यह 39 लाख एकड़ के करीब नहीं पहुँचता।
शहर | क्षेत्रफल (लाख एकड़) |
---|---|
दिल्ली | 3.60 |
मुंबई | 1.50 |
बेंगलुरु | 2.20 |
चेन्नई | 1.00 |
हैदराबाद | 1.70 |
कोलकाता | 1.20 |
पुणे | 1.275 |
अहमदाबाद | 1.31 |
कुल | 13.785 लाख एकड़ |
तो, वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन कौन करता है?
कानूनी रूप से अल्लाह को वक्फ संपत्तियों का मालिक माना जाता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसे mutawalli नाम के संरक्षक प्रबंधित करते हैं। भारत में 32 राज्य वक्फ बोर्ड इन संपत्तियों की देखभाल करते हैं।
विवादों और कानूनी बदलावों की कहानी
2013 में हुए वक्फ अधिनियम संशोधन के बाद, इसमें Section 40 जोड़ा गया, जिससे वक्फ बोर्डों को संपत्तियों पर और अधिक अधिकार मिल गए। 2025 के नए संशोधन में सरकार ने इस सेक्शन को हटा दिया, जिसे "सबसे कठोर प्रावधान" माना जा रहा था।
क्या ‘Waqf by User’ नियम से जमीन बढ़ी?
एक और दिलचस्प पहलू 'Waqf by User' प्रावधान है। इसके तहत, अगर कोई जमीन लंबे समय तक धार्मिक या परोपकारी कार्यों में इस्तेमाल होती रही हो, तो उसे वक्फ संपत्ति माना जा सकता था।
भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रकार
संपत्ति का प्रकार | संख्या (लाख में) |
---|---|
कब्रिस्तान | 1.5 |
कृषि भूमि | 1.4 |
मस्जिद | 1.2 |
इतिहास की झलक – भारत में वक्फ संपत्तियों की शुरुआत कब हुई?
भारत में वक्फ की शुरुआत 12वीं शताब्दी में हुई, जब मुहम्मद गोरी ने मुल्तान में दो गाँव दान किए। इसके बाद, धीरे-धीरे वक्फ संपत्तियों की संख्या बढ़ती चली गई। लेकिन पिछले 12 वर्षों में इसका विस्तार सबसे तेज़ हुआ है।
क्या वक्फ भूमि पर पारदर्शिता जरूरी है?
इतनी विशाल भूमि का मालिकाना हक़ और प्रबंधन हमेशा से विवादों में रहा है। इसीलिए सरकार अब इसे अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने की दिशा में काम कर रही है। नए वक्फ संशोधन बिल का उद्देश्य भी यही है कि किसी भी तरह के अनियमित भूमि हस्तांतरण को रोका जाए।
निष्कर्ष – वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण या संरक्षण?
यह बहस लंबे समय तक चलने वाली है कि वक्फ बोर्डों के पास इतनी ज़मीन कैसे आई? क्या यह सही तरीके से प्रबंधित हो रही है? या फिर इसे पारदर्शिता के नाम पर राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है?
पर एक बात तय है – 39 लाख एकड़ ज़मीन का सही इस्तेमाल हो, तो इससे न सिर्फ धार्मिक उद्देश्यों, बल्कि समाज के जरूरतमंद तबकों की मदद भी हो सकती है। बस जरूरत है पारदर्शिता और जवाबदेही की!
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