अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक नई लिथियम-आयन बैटरी (Lithium-ion Battery) विकसित की है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए डिज़ाइन की गई है। यह बैटरी ठंडे मौसम में भी हाई रेंज और फास्ट चार्जिंग की सुविधा देती है। खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए किसी नए केमिकल या उत्पादन प्रक्रिया में बदलाव करने की जरूरत नहीं है।
-10°C में भी फास्ट चार्जिंग
मिशिगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी EV बैटरी विकसित की है, जो केवल 10 मिनट में फुल चार्ज हो सकती है, चाहे तापमान -10°C ही क्यों न हो। इस तकनीक को Arbor Battery Innovations ने लाइसेंस कर लिया है और इसे जल्द ही कमर्शियल मार्केट में लाया जाएगा।
"फास्ट चार्जिंग बिना किसी समझौते के"
Arbor के CEO Dr. Andrew Davis का कहना है कि, "हम बैटरी निर्माताओं से केमिस्ट्री बदलने या प्रोडक्शन में किसी बड़े बदलाव की मांग नहीं कर रहे। हमारी तकनीक मौजूदा बैटरी फैक्ट्रीज़ में आसानी से फिट हो सकती है और भविष्य की जरूरतों को पूरा कर सकती है।"
ठंड में बैटरी चार्जिंग की समस्या और उसका समाधान
फिलहाल EV बैटरियां लिक्विड इलेक्ट्रोलाइट (Liquid Electrolyte) के माध्यम से लिथियम आयन को इलेक्ट्रोड्स के बीच स्थानांतरित कर ऊर्जा स्टोर और रिलीज़ करती हैं। लेकिन ठंडे मौसम में यह प्रोसेस धीमा हो जाता है, जिससे चार्जिंग टाइम बढ़ जाता है। इसे ठीक करने के लिए ऑटोमेकर्स ने बैटरी सेल्स में मोटे इलेक्ट्रोड्स का उपयोग किया, लेकिन इसका नकारात्मक प्रभाव चार्जिंग स्पीड पर पड़ा।
HOLE टेक्नोलॉजी का फेल होना
पहले इस समस्या को हल करने के लिए Highly Ordered Laser-patterned Electrodes (HOLE) तकनीक का सुझाव दिया गया था, जिसमें बैटरी इलेक्ट्रोड में वर्टिकल चैनल्स बनाए गए ताकि लिथियम आयन तेजी से मूव कर सके। हालांकि, यह ठंडे वातावरण में Li प्लेटिंग (Lithium Plating) की वजह से असफल रही। Li प्लेटिंग में धात्विक लिथियम की परत बन जाती है, जिससे बैटरी की क्षमता और परफॉर्मेंस घट जाती है।
"ठंड में बटर काटने जैसी समस्या"
शोधकर्ता Neil Dasgupta का कहना है कि यह समस्या बटर की तरह है। "जब यह गर्म होता है, तो इसे आसानी से काटा जा सकता है, लेकिन ठंड में यह कठिन हो जाता है।" यही समस्या बैटरी चार्जिंग के दौरान भी आती है।
समाधान: ग्लासी सॉलिड इलेक्ट्रोलाइट कोटिंग
शोधकर्ताओं ने इस समस्या से बचने के लिए बैटरी पर 20-नैनोमीटर की ग्लासी सामग्री की कोटिंग की। यह कोटिंग, जिसे LBCO (Li₃BO₃-Li₂CO₃) कहा जाता है, बैटरी की क्षमता को सुरक्षित रखती है और तेजी से चार्जिंग में मदद करती है। यह कोटिंग ALD (Atomic Layer Deposition) तकनीक से लगाई गई, जिससे बैटरी की परफॉर्मेंस 400-500% तक बढ़ गई।
बेहतर परफॉर्मेंस और लॉन्ग लाइफ
वैज्ञानिकों के अनुसार, LBCO-HOLE तकनीक वाली बैटरियां 100 चार्जिंग साइकल्स के बाद भी 92-97% क्षमता बनाए रखती हैं, जबकि बिना कोटिंग वाली बैटरियां 50% से भी नीचे गिर जाती हैं। LBCO कोटिंग से बैटरी की परफॉर्मेंस और लाइफ दोनों ही बेहतर हो जाती हैं।
यह नई EV बैटरी तकनीक इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के भविष्य को और बेहतर बना सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां ठंड का मौसम बैटरी परफॉर्मेंस को प्रभावित करता है।
यह भी पढ़े –
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की ओर बढ़ता भारत India moving towards electric vehicles