भारत की संसद ने एक बेहद विवादास्पद बिल पास कर दिया है, जिसे लेकर काफी हंगामा हुआ। इस बिल का मकसद मुस्लिम समुदाय की वक्फ (Waqf) प्रॉपर्टीज के मैनेजमेंट को बदलना बताया जा रहा है। लेकिन सवाल ये है कि क्या यह बदलाव सुधार के लिए है या किसी और मकसद से लाया गया है?
वक्फ (संशोधन) बिल 2024 को संसद से मिली हरी झंडी
गुरुवार को लोकसभा और फिर शुक्रवार को राज्यसभा ने Waqf (Amendment) Bill, 2024 को पास कर दिया।
हालांकि, इस दौरान विपक्षी पार्टियों और मुस्लिम नेताओं ने इसे जमकर विरोध किया।
उनका कहना है कि यह "असंवैधानिक" है और इससे भारत में मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर असर पड़ेगा।
दूसरी तरफ, सरकार का तर्क है कि इस बिल से वक्फ प्रॉपर्टीज की ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी बढ़ेगी।
अब यह बिल राष्ट्रपति के पास जाएगा और उनके साइन के बाद यह कानून बन जाएगा।
मोदी सरकार का समर्थन, विपक्ष का कड़ा विरोध
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बिल को एक "ऐतिहासिक कदम" बताया।
उन्होंने X (पहले Twitter) पर लिखा कि वक्फ सिस्टम सालों से पारदर्शिता की कमी से जूझ रहा था।
"संसद द्वारा पारित यह कानून लोगों के अधिकारों की रक्षा करेगा," उन्होंने कहा।
वहीं, विपक्ष ने इसे BJP सरकार की अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कमजोर करने की एक और कोशिश बताया।
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने लिखा,
"लोकसभा में 288 सांसदों ने इसके पक्ष में और 232 ने विरोध में वोट डाला। इससे साफ है कि इस बिल को जबरदस्ती पास कराया गया।"
AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तो इस बिल को सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है।
आखिर वक्फ प्रॉपर्टी होती क्या है?
मुस्लिम समुदाय के लिए वक्फ एक पवित्र परंपरा है।
यह वो संपत्तियां होती हैं जो किसी ने चैरिटी के रूप में डोनेट की होती हैं और जिनका इस्तेमाल मस्जिदों, मदरसों, कब्रिस्तानों और अनाथालयों के लिए किया जाता है।
इन संपत्तियों को बेचा या किसी और मकसद से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
भारत में Waqf Act, 1995 के तहत वक्फ बोर्ड बनाए गए थे, जो इन प्रॉपर्टीज का मैनेजमेंट देखते हैं।
सरकार क्यों ला रही है नया बिल?
BJP सरकार का कहना है कि वक्फ बोर्ड्स में भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी को खत्म करने के लिए यह बिल लाया गया है।
सरकार चाहती है कि इन संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन और मैनेजमेंट बेहतर हो।
लेकिन मुस्लिम नेताओं और विपक्षी पार्टियों का दावा है कि यह सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों पर कब्जा जमाने की चाल हो सकती है।
इस नए बिल में क्या बदलाव किए गए हैं?
1️⃣ वक्फ प्रॉपर्टी की पहचान पर नया नियम
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पहले, मौखिक घोषणाओं और समुदाय की मान्यताओं के आधार पर प्रॉपर्टी को वक्फ माना जाता था।
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लेकिन अब वक्फ बोर्ड को वैध दस्तावेज जमा करने होंगे।
2️⃣ सरकार का अंतिम फैसला
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यदि किसी जमीन को लेकर विवाद होता है, खासकर जब सरकार उसे अपनी संपत्ति माने, तो अंतिम निर्णय सरकार ही लेगी।
3️⃣ गैर-मुस्लिम भी होंगे वक्फ बोर्ड का हिस्सा
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अब वक्फ बोर्ड और ट्रिब्यूनल्स में गैर-मुस्लिम्स की नियुक्ति की जा सकेगी।
4️⃣ कोर्ट का दखल बढ़ेगा
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पहले वक्फ ट्रिब्यूनल का निर्णय अंतिम होता था, लेकिन अब कोर्ट्स भी इसमें हस्तक्षेप कर सकती हैं।
5️⃣ सभी वक्फ प्रॉपर्टीज को नए सिस्टम में लाना अनिवार्य
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छह महीने के अंदर सभी वक्फ संपत्तियों को एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम में रजिस्टर करना होगा।
6️⃣ सरकार का सर्वे बढ़ेगा
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अब सरकार को वक्फ प्रॉपर्टीज की मॉनिटरिंग करने और उनके सर्वे करने का अधिक अधिकार होगा।
क्या यह बिल मुस्लिम समुदाय के लिए खतरा है?
यह बिल पास होने के बाद मुस्लिम समुदाय में नाराजगी देखी जा रही है।
मुस्लिम नेताओं का मानना है कि यह सरकार को वक्फ प्रॉपर्टीज पर सीधा कंट्रोल देने के लिए लाया गया है।
कुछ लोगों को डर है कि कहीं ये बिल सरकारी जमीनों को वक्फ संपत्तियों से अलग करने का बहाना तो नहीं?
वहीं, सरकार का कहना है कि यह भ्रष्टाचार को रोकने और वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए है।
अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस पर क्या फैसला सुनाता है और इसका मुस्लिम समुदाय और भारत की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
क्या यह कानून एक सुधार है या एक और विवाद?
सरकार इसे सुधार कह रही है, तो विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ साजिश बता रहा है।
यह बिल वक्फ संपत्तियों के भविष्य को पूरी तरह बदल सकता है।
अब सवाल यह है कि क्या यह मुस्लिम समुदाय के अधिकारों की रक्षा करेगा या उनके लिए नई मुश्किलें खड़ी करेगा?
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