जब संसद में वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक, 2025 पास
हुआ, तो केरल और कर्नाटक में हिंदू और ईसाई समुदायों से जुड़े
पुराने जमीन विवाद फिर से चर्चा में आ गए। इन राज्यों में कई परिवार दशकों से उस
जमीन पर रह रहे थे, जिसे अब वक़्फ़ संपत्ति बताया जा रहा है।
केरल का भूमि विवाद: 600 परिवारों की अनिश्चितता
केरल के एर्नाकुलम ज़िले के मुनाम्बम और
चेराई के मछुआरों के गांवों में 610 से अधिक परिवार रहते हैं,
जिनमें अधिकांश लैटिन कैथोलिक ईसाई और
पिछड़े हिंदू समुदायों से हैं। लेकिन,
एक लंबे समय से चल रहे विवाद के कारण ये
लोग बेदखली के डर में जी रहे हैं, क्योंकि केरल वक़्फ़ बोर्ड ने इस क्षेत्र की 404 एकड़ भूमि पर अपना
दावा ठोक दिया है।
विवाद
की उत्पत्ति
1902 में त्रावणकोर के शाही परिवार ने इस भूमि को अब्दुल सत्तार
मूसा सैत नाम के व्यापारी को लीज़ पर दिया था,
जो बाद में उनके उत्तराधिकारी मोहम्मद
सिद्दीक सैत को ट्रांसफर हो गया। 1950
में,
सैत ने इस भूमि को वक़्फ़ डीड के तहत
मुस्लिम समुदाय के लिए बनी फारूक कॉलेज को दान कर दिया।
विवाद
दोबारा कैसे उठा?
2008 में, केरल सरकार ने वक़्फ़ भूमि प्रबंधन में अनियमितताओं की जांच के
लिए निस्सार आयोग बनाया। 2009 में इसकी रिपोर्ट में मुनाम्बम भूमि को वक़्फ़ संपत्ति घोषित
कर दिया गया और इसे वापस लेने की सिफारिश की गई। 2019
में,
वक़्फ़ बोर्ड ने इसे वक़्फ़ संपत्ति
घोषित कर दिया, जिससे स्थानीय निवासियों के लिए अपनी संपत्तियों को बेचना, गिरवी रखना या कानूनी
रूप से उपयोग करना असंभव हो गया।
कर्नाटक
का विवाद: किसानों के लिए मुश्किलें
कर्नाटक के विजयपुरा जिले में भी एक
बड़ा वक़्फ़ भूमि विवाद सामने आया,
जहां 1,200
एकड़ से अधिक कृषि भूमि अचानक सरकारी
रिकॉर्ड में वक़्फ़ संपत्ति के रूप में दर्ज हो गई। इससे सैकड़ों किसान विस्थापन
के खतरे में आ गए।
विजयपुरा
में विवाद कैसे उभरा?
अक्टूबर 2023
में किसानों को तहसीलदार से नोटिस मिला
कि उनकी भूमि अब वक़्फ़ के अधिकार क्षेत्र में आती है। जांच में पाया गया कि
सितंबर-अक्टूबर 2023 के बीच 44 संपत्तियों के रिकॉर्ड बदल दिए गए थे, जिससे 433 किसानों की जमीन पर
विवाद खड़ा हो गया।
कर्नाटक
सरकार की प्रतिक्रिया
प्रदर्शनों के बाद, कर्नाटक सरकार ने इसे
1974 के गजट नोटिफिकेशन में एक ‘क्लेरिकल एरर’
(clerical error) बताया। सरकार ने आश्वासन दिया कि नोटिस
वापस लिए जाएंगे और जांच जारी है। हालांकि,
विपक्षी बीजेपी ने इसे कांग्रेस सरकार
की मिलीभगत बताते हुए आरोप लगाया कि यह वक़्फ़ के नाम पर भूमि हड़पने की साजिश है।
वक़्फ़
(संशोधन) विधेयक, 2025 क्या कहता है?
इस नए कानून में वक़्फ़ भूमि प्रशासन को
सुधारने के लिए कुछ बदलाव किए गए हैं:
- वक़्फ़ रिकॉर्ड्स का डिजिटलाइजेशन
- अवैध भूमि ट्रांसफर रोकने के लिए सख्त ऑडिट
- ज़ब्त वक़्फ़ संपत्तियों को वापस लेने के लिए कानूनी
प्रावधान
हालांकि,
आलोचकों का कहना है कि यह कानून केरल और
कर्नाटक जैसे विवादों का समाधान नहीं करता,
जहां दशकों से लोग वक़्फ़ संपत्ति पर
दावा कर रहे हैं।