भारत के उत्पादों पर 27% का टैरिफ लगाया गया है, जबकि चीन और वियतनाम के उत्पादों पर क्रमशः 34% और 46% का टैरिफ लगाया गया है। इस कारण भारत को अमेरिकी बाजार में एक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।
भारत
को कैसे मिल सकता है लाभ? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित किए गए पारस्परिक व्यापार
शुल्कों के बाद, भारतीय सोलर उपकरण निर्माताओं को चीन और
वियतनाम के मुकाबले बढ़त मिल सकती है। हालांकि, इन शुल्कों
से अमेरिकी बिजली उत्पादकों की लागत बढ़ सकती है और निर्यातकों की बिक्री पर
प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन भारत पर अपेक्षाकृत कम टैरिफ लगने
के कारण भारत के लिए यह फायदेमंद साबित हो सकता है।
अमेरिका
द्वारा लागू टैरिफ दरें अमेरिका ने भारतीय निर्यातों पर 27% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है, जबकि चीन और वियतनाम पर क्रमशः
34% और 46% का शुल्क लागू किया गया है।
वर्तमान में भारतीय सोलर निर्यातों पर 14% का टैरिफ लागू है।
हालांकि, विस्तृत विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन शुरुआती विश्लेषण से भारतीय सोलर निर्माताओं के लिए एक सकारात्मक
स्थिति बनती दिख रही है।
भारतीय
सोलर बाजार की स्थिति भारतीय सोलर उपकरण निर्माताओं के
संघ (ISMA)
के अध्यक्ष अश्विनी सहगल ने कहा, "ऐसा
प्रतीत होता है कि भारतीय उत्पादों पर लगाया गया शुल्क चीन और वियतनाम की तुलना
में कम है, जो कि मॉड्यूल और सेल्स के प्रमुख आपूर्तिकर्ता
हैं। इससे भारत को अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बढ़त मिल सकती है।"
भारत
ने वित्तीय वर्ष 2024
में 1.96 अरब डॉलर के सोलर मॉड्यूल का निर्यात
किया, जिसमें से 1.93 अरब डॉलर का
निर्यात अमेरिका को किया गया। चीन अभी भी वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना हुआ है,
जिसने 2023 में कुल 49 अरब
डॉलर के सोलर मॉड्यूल का निर्यात किया।
भारतीय
उत्पाद होंगे महंगे? हालांकि, इन शुल्कों के कारण भारतीय आपूर्ति अमेरिकी
निर्मित सोलर उपकरणों की तुलना में अधिक महंगी हो सकती है। ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (CEEW) की एक रिपोर्ट के
अनुसार, भारतीय सोलर निर्माताओं का निर्यात बाजार कीमतों की
असमानता के कारण सिकुड़ सकता है।
अन्य
बाजारों की तलाश भारत सरकार अफ्रीकी और पश्चिम
एशियाई देशों के साथ सीधे सरकारी वार्ताओं में लगी हुई है ताकि भारतीय हरित ऊर्जा
कंपनियों और सोलर उपकरण निर्माताओं के लिए अमेरिकी बाजार से परे नए बाजार खोले जा
सकें। वर्तमान में भारत की सोलर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता 74 GW और सोलर सेल्स की उत्पादन क्षमता 9 GW है।